हिंदी दुआएँ

जुमा मुबारक दुआएँ

Supplications shown with Arabic, translation and a clear reference where applicable.

शुक्रवार की सरल और दिल से निकली दुआएँ। ये मूल दुआएँ हैं, कुरान की आयतें या हदीस नहीं।

200 संदेशArabic with translationमूल सामग्रीहिन्दी
01

Supplications

Duas for Friday

Read the Arabic, follow the translation, and make the words your own in your own language.

  1. 01

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को हिदायत और ज़बानों को सच्चाई दे।

  2. 02

    ऐ अल्लाह! हमें ऐसा रिज़्क दे जो हलाल हो और दिल को सुकून दे।

  3. 03

    ऐ अल्लाह! हमारे गुनाह माफ़ कर और हमें अपनी रहमत में ढाँप ले।

  4. 04

    ऐ अल्लाह! जो हमारे साथ बुरा करते हैं उन्हें हिदायत दे और हमें माफ़ कर।

  5. 05

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद के दिलों में अपनी मोहब्बत डाल दे।

  6. 06

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों को हर बुराई से महफ़ूज़ रख।

  7. 07

    ऐ अल्लाह! हमें सेहत और तंदुरुस्ती दे।

  8. 08

    ऐ अल्लाह! हमें अपने करीब कर दे और दुनिया की मोहब्बत से बचा।

  9. 09

    ऐ अल्लाह! हमें सब्र की तौफ़ीक दे और मुश्किलों में आसानी दे।

  10. 10

    ऐ अल्लाह! हमें नेक आमाल की तौफ़ीक दे और उन्हें कबूल फ़रमा।

  11. 11

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों में बरकत और सुकून उतार।

  12. 12

    ऐ अल्लाह! हमें दूसरों की ग़ीबत और बुराई से बचा।

  13. 13

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को अपनी याद से आबाद फ़रमा।

  14. 14

    ऐ अल्लाह! हमें शैतान के वसवसों से महफ़ूज़ रख।

  15. 15

    ऐ अल्लाह! हमारे घर के हर फ़र्द को अपनी हिफ़ाज़त में रख।

  16. 16

    ऐ अल्लाह! हमारी कमज़ोरियों को अपनी ताकत से ढाँप दे।

  17. 17

    ऐ अल्लाह! हमें दूसरों की खिदमत करने की तौफ़ीक दे।

  18. 18

    ऐ अल्लाह! हमें वह दिल दे जो सब्र करे और वह ज़बान दे जो शुक्र करे।

  19. 19

    ऐ अल्लाह! हमें अपने बंदों के लिए रहमत बना।

  20. 20

    ऐ अल्लाह! हमारी कोताहियों को अपनी वसीअ रहमत से ढाँप ले।

  21. 21

    ऐ अल्लाह! हमें ईमान की हालत में जीने और मरने की तौफ़ीक दे।

  22. 22

    ऐ अल्लाह! हमारे घरवालों को सेहत और लंबी उम्र दे।

  23. 23

    ऐ अल्लाह! हमारी आजिज़ी कबूल फ़रमा और हमारी खताएँ माफ़ फ़रमा।

  24. 24

    ऐ अल्लाह! हमें इस दुनिया की बेचैनी से बचाकर अपनी तरफ़ बुला ले।

  25. 25

    ऐ अल्लाह! जो ज़ुल्म का शिकार हैं उनकी मदद फ़रमा और उनका हक दिला दे।

  26. 26

    ऐ अल्लाह! हमारी ज़िंदगी के हर पल में खैर और बरकत भर दे।

  27. 27

    ऐ अल्लाह! हमें नेक सोहबत और अच्छे दोस्त दे।

  28. 28

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को अपनी मोहब्बत की रोशनी से रोशन फ़रमा।

  29. 29

    ऐ अल्लाह! हमें बुरी आदतों से बचा और अच्छी आदतें दे।

  30. 30

    ऐ अल्लाह! हमारे माल में बरकत दे और उसे हमारे लिए सदका बना दे।

  31. 31

    ऐ अल्लाह! हमें हर हाल में तेरी ज़ात पर भरोसा करने वाला बना।

  32. 32

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को सुकून और ज़बानों को ज़िक्र से तर रख।

  33. 33

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों में कुरान की तिलावत और मोहब्बत का नूर भर दे।

  34. 34

    ऐ अल्लाह! हमारी बख्शिश फ़रमा और हमें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह दे।

  35. 35

    ऐ अल्लाह! हमें बेसब्री से बचा और सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।

  36. 36

    ऐ अल्लाह! हमारे कामों में आसानी पैदा फ़रमा और हमें हिम्मत दे।

  37. 37

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी नेमतों की कद्र करने वाला बना।

  38. 38

    ऐ अल्लाह! हमें दीन की समझ और उस पर अमल की तौफ़ीक दे।

  39. 39

    ऐ अल्लाह! हमारे साथ नरमी का मामला फ़रमा और हमें माफ़ फ़रमा।

  40. 40

    ऐ अल्लाह! हमारी मुश्किलों को आसान और हमारी दुआओं को कबूल फ़रमा।

  41. 41

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद को हमारी तरह तेरा शुक्रगुज़ार बना।

  42. 42

    ऐ अल्लाह! हमें जुमे के दिन की खास बरकतें अता फ़रमा।

  43. 43

    ऐ अल्लाह! हमें अपने करीब कर दे और हम से राज़ी हो जा।

  44. 44

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को दुनिया की मोहब्बत से ज़्यादा अपनी मोहब्बत से भर दे।

  45. 45

    ऐ अल्लाह! हमें अपने दीन की खिदमत की तौफ़ीक दे।

  46. 46

    ऐ अल्लाह! हमारी मदद फ़रमा कि हम तेरा ज़िक्र अच्छी तरह कर सकें।

  47. 47

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद और हमारी नस्लों को हिदायत दे।

  48. 48

    ऐ अल्लाह! हमें खुशी में शुक्र और तकलीफ़ में सब्र दे।

  49. 49

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी जन्नत में अपने नेक बंदों के साथ जमा फ़रमा।

  50. 50

    ऐ अल्लाह! हमारी नीयत में इख़्लास और हमारे अमल में कबूलियत दे।

  51. 51

    ऐ अल्लाह! हमारे रिश्तों में नरमी और मोहब्बत बनाए रख।

  52. 52

    ऐ अल्लाह! हमारी आँखों और कानों को गुनाह से बचा कर रख।

  53. 53

    ऐ अल्लाह! हमें ऐसी औलाद दे जो तेरी इबादत करे और हमारे लिए दुआ करे।

  54. 54

    ऐ अल्लाह! हमारी आखिरी साँस कलमा-ए-तय्यिबा पर हो।

  55. 55

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों से ग़फ़लत दूर कर और याद को ताज़ा रख।

  56. 56

    ऐ अल्लाह! हमें भाइयों और बहनों की मोहब्बत और मदद अता फ़रमा।

  57. 57

    ऐ अल्लाह! हमारी सेहत, रिज़्क और इज़्ज़त में बरकत दे।

  58. 58

    ऐ अल्लाह! हमारी दुआ में असर डाल और हमें उम्मीद अता फ़रमा।

  59. 59

    ऐ अल्लाह! हमें हलाल की कमाई और हराम से बचने की तौफ़ीक दे।

  60. 60

    ऐ अल्लाह! हमारे घर में सादगी, सुकून और मोहब्बत कायम रख।

  61. 61

    ऐ अल्लाह! हमें और हमारी औलाद को सही राह पर कायम रख।

  62. 62

    ऐ अल्लाह! हमारे दिल को जुमे की बरकत से रोशन फ़रमा।

  63. 63

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी नाफ़रमानी से बचा और अपनी रज़ा की राह दिखा।

  64. 64

    ऐ अल्लाह! हमारी बीमारियों को शिफ़ा और दुखों को राहत में बदल दे।

  65. 65

    ऐ अल्लाह! हमारे मरहूम अज़ीज़ों को अपनी जन्नत में जगह दे।

  66. 66

    ऐ अल्लाह! हमें हर इम्तिहान में डटे रहने की हिम्मत दे।

  67. 67

    ऐ अल्लाह! हमारी अच्छी इच्छाओं को पूरा फ़रमा।

  68. 68

    ऐ अल्लाह! हमें ऐसे दिन दे जो तेरी रज़ा के हों।

  69. 69

    ऐ अल्लाह! हमारे बीमारों को आफ़ियत और सेहत दे।

  70. 70

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी नेमतों पर शुक्र करने की तौफ़ीक दे।

  71. 71

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को इख़्लास से भर दे।

  72. 72

    ऐ अल्लाह! हमें दुआ में यकीन और अमल में इख़्लास अता फ़रमा।

  73. 73

    ऐ अल्लाह! हमें दूसरों के दुख में शरीक होने वाला बना।

  74. 74

    ऐ अल्लाह! हमारी आँखों को अपनी रज़ा में रोशन रख।

  75. 75

    ऐ अल्लाह! हमें नेक लोगों के साथ जीने और मरने की तौफ़ीक दे।

  76. 76

    ऐ अल्लाह! हमारी ज़बानों से हमेशा भलाई की बात निकले।

  77. 77

    ऐ अल्लाह! हमारे दिल में अपना खौफ़ और अपनी मोहब्बत दोनों जमा फ़रमा।

  78. 78

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी राह पर चलने की हिम्मत दे।

  79. 79

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों में सुकून और दिलों में ईमान अता फ़रमा।

  80. 80

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद को हमारे लिए सदका-ए-जारिया बना।

  81. 81

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी कुर्बत की लज़्ज़त अता फ़रमा।

  82. 82

    ऐ अल्लाह! हमारी कमाई में बरकत दे और उसे हराम से बचा।

  83. 83

    ऐ अल्लाह! हमें दुआ की कबूलियत का नूर अता फ़रमा।

  84. 84

    ऐ अल्लाह! हमें जुमे के दिन का हक अदा करने की तौफ़ीक दे।

  85. 85

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को सुकून और रूह को ताज़गी अता फ़रमा।

  86. 86

    ऐ अल्लाह! हमें हर हाल में अपनी रज़ा पर राज़ी रख।

  87. 87

    ऐ अल्लाह! हमारे सब गुनाह माफ़ फ़रमा और हमें साफ़ दिल अता कर।

  88. 88

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी जन्नत के दरवाज़ों से दाखिल फ़रमा।

  89. 89

    ऐ अल्लाह! हमारे स्कूलों और मदरसों के बच्चों को इल्म और अदब अता फ़रमा।

  90. 90

    ऐ अल्लाह! हमारे किसानों की मेहनत में बरकत दे और उनकी फसल अच्छी कर।

  91. 91

    ऐ अल्लाह! अस्पतालों में काम करने वालों को हिम्मत और सब्र दे।

  92. 92

    ऐ अल्लाह! हमारे पड़ोसियों के साथ मोहब्बत और अमन का रिश्ता कायम रख।

  93. 93

    ऐ अल्लाह! सफ़र करने वालों की हिफ़ाज़त फ़रमा और उन्हें खैर से घर पहुँचा।

  94. 94

    ऐ अल्लाह! यतीम बच्चों को सहारा दे और उनकी परवरिश आसान कर।

  95. 95

    ऐ अल्लाह! हमारे मज़दूरों की मेहनत का सही अज्र अता फ़रमा।

  96. 96

    ऐ अल्लाह! बीमार बच्चों को शिफ़ा दे और उनके माता-पिता को सब्र दे।

  97. 97

    ऐ अल्लाह! जो भीख के लिए हाथ फैलाते हैं उनकी ज़रूरत पूरी फ़रमा।

  98. 98

    ऐ अल्लाह! हमारे पति-पत्नी को एक-दूसरे के लिए सुकून का ज़रिया बना।

  99. 99

    ऐ अल्लाह! हमारे घर में किसी की जान का नुकसान न हो, सबको सलामत रख।

  100. 100

    ऐ अल्लाह! हमारे मेहमानों को इज़्ज़त और हमारे दस्तरख्वान को बरकत दे।

  101. 101

    ऐ अल्लाह! हमारे परदेसी भाइयों को सलामती के साथ उनके घरों तक पहुँचा।

  102. 102

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को घमंड से पाक करके तवाज़ो अता फ़रमा।

  103. 103

    ऐ अल्लाह! हमारी बुझती उम्मीदों के चराग़ों को रोशन फ़रमा।

  104. 104

    ऐ अल्लाह! जो भूखे हैं उन्हें खाना और जो प्यासे हैं उन्हें पानी अता फ़रमा।

  105. 105

    ऐ अल्लाह! हमारे छोटे भाई-बहनों को सेहत, इल्म और खुशी दे।

  106. 106

    ऐ अल्लाह! हमारे बुज़ुर्गों की दुआओं को हमारे लिए बरकत बना दे।

  107. 107

    ऐ अल्लाह! हमारी नस्लों को दीन की समझ और अखलाक की दौलत अता फ़रमा।

  108. 108

    ऐ अल्लाह! हमारी आँखों को आँसू से ज़्यादा तेरी रज़ा की तरफ़ देखने की तौफ़ीक दे।

  109. 109

    ऐ अल्लाह! जो कैद में हैं उन्हें आज़ादी दे और उनके घरों को सुकून दे।

  110. 110

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को अपनी याद में इतना लगा दे कि दुनिया की फ़िक्र छोटी लगे।

  111. 111

    ऐ अल्लाह! हमारी माफ़ी की ताक़त बढ़ा और हमारे दिलों को नरम कर।

  112. 112

    ऐ अल्लाह! हमारे बच्चों को सही राह दिखा और उनके दिल साफ़ फ़रमा।

  113. 113

    ऐ अल्लाह! जो मुश्किल में हैं उन्हें सब्र और आसानी दोनों अता फ़रमा।

  114. 114

    ऐ अल्लाह! हमारी मस्जिदों को आबाद रख और नमाज़ियों के दिल रोशन कर।

  115. 115

    ऐ अल्लाह! जो बीमार हैं उन्हें तंदुरुस्ती दे और जो सेहतमंद हैं उन्हें शुक्र की तौफ़ीक दे।

  116. 116

    ऐ अल्लाह! हमारे सभी रिश्तेदारों के दिलों में सुलह और मोहब्बत डाल दे।

  117. 117

    ऐ अल्लाह! हमारे काम की जगह पर अमन और इंसाफ़ का माहौल बना।

  118. 118

    ऐ अल्लाह! हमारे घर में पैसे की तंगी दूर फ़रमा और बरकत दे।

  119. 119

    ऐ अल्लाह! हमें वह हिम्मत दे जो सच बोलने और सच पर कायम रहने के लिए ज़रूरी है।

  120. 120

    ऐ अल्लाह! हमारी बेटियों की शादी और ज़िंदगी को अच्छा और बरकत वाला बना।

  121. 121

    ऐ अल्लाह! हमारे बच्चों को कुरान की मोहब्बत और दीन की समझ अता फ़रमा।

  122. 122

    ऐ अल्लाह! हमारे नौजवानों को बुरे दोस्तों और बुरी आदतों से बचा।

  123. 123

    ऐ अल्लाह! हमारे दिल को अच्छाई की तरफ़ मायल कर और बुराई से दूर रख।

  124. 124

    ऐ अल्लाह! जो नौकरी ढूँढ रहे हैं उन्हें अच्छी नौकरी अता फ़रमा।

  125. 125

    ऐ अल्लाह! हमारे घर के हर कोने में अपना ज़िक्र और नूर भर दे।

  126. 126

    ऐ अल्लाह! हमारी सेहत में बरकत दे और हमारे वक्त को अच्छे काम में लगा।

  127. 127

    ऐ अल्लाह! हमारे दुश्मनों के शर से हमारी हिफ़ाज़त फ़रमा।

  128. 128

    ऐ अल्लाह! हमारे गुनाहों की माफ़ी के लिए हमारा दिल नज़र आए और तौबा कबूल हो।

  129. 129

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों से गफ़लत और भूल को दूर कर और याद को ताज़ा कर।

  130. 130

    ऐ अल्लाह! जो कर्ज़ में हैं उनका कर्ज़ उतार दे और उन्हें बोझ से आज़ाद कर।

  131. 131

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों में अपनी मोहब्बत का शौक और इबादत का लुत्फ़ डाल दे।

  132. 132

    ऐ अल्लाह! हमारे शहर और मुल्क में अमन, इंसाफ़ और बरकत कायम फ़रमा।

  133. 133

    ऐ अल्लाह! हमारे आस-पास के लोगों को हिदायत दे और उनके दिल खोल दे।

  134. 134

    ऐ अल्लाह! हमें दूसरों की मुश्किल में काम आने वाला बना।

  135. 135

    ऐ अल्लाह! हमारे माता-पिता को जन्नत में आला मुकाम अता फ़रमा।

  136. 136

    ऐ अल्लाह! हमारी आँखों को गुनाह से और कानों को बुरी बातों से दूर रख।

  137. 137

    ऐ अल्लाह! हमारे बुज़ुर्गों और बच्चों दोनों को अपनी हिफ़ाज़त में रख।

  138. 138

    ऐ अल्लाह! हमारी सेहत, रिज़्क और इज़्ज़त सब में बरकत और सुकून दे।

  139. 139

    ऐ अल्लाह! हमारे बच्चों को हमारी आँखों की ठंडक बना दे।

  140. 140

    ऐ अल्लाह! हमारे घर के हर झगड़े को खत्म कर और मोहब्बत लौटा दे।

  141. 141

    ऐ अल्लाह! जो भी तेरे दरबार में दुआ करता है, उसकी दुआ कबूल फ़रमा।

  142. 142

    ऐ अल्लाह! हमारी दुआ को हमारे और हमारे अपनों के लिए बरकत बना।

  143. 143

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद को दुनिया की ज़ीनत से बचाकर अपने रास्ते पर चला।

  144. 144

    ऐ अल्लाह! हमारी खुशियों को शुक्र और ग़म को सब्र में बदल दे।

  145. 145

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों से नफ़रत निकाल कर मोहब्बत भर दे।

  146. 146

    ऐ अल्लाह! हमारे काम और ज़बान दोनों में सच्चाई और बरकत रख।

  147. 147

    ऐ अल्लाह! जो वक्त की कद्र नहीं करते उन्हें समझ और होश दे।

  148. 148

    ऐ अल्लाह! हमारे घर की छत और दिल दोनों को रहमत से ढाँप ले।

  149. 149

    ऐ अल्लाह! हमारे पड़ोस में कोई भूखा न सोए, सबको रिज़्क दे।

  150. 150

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों की शाम सुकून और सुबह बरकत वाली कर दे।

  151. 151

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को तेरा ज़िक्र मिले और हमारे वक्त को तेरा शुक्र।

  152. 152

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद को ऐसा बना जो दीन और दुनिया दोनों में इज़्ज़त पाए।

  153. 153

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों की सख्ती दूर कर और हमें नरमी और मोहब्बत अता फ़रमा।

  154. 154

    ऐ अल्लाह! हमारी मुश्किलों को अपनी रहमत से आसान फ़रमा और सुकून बख्श।

  155. 155

    ऐ अल्लाह! हमारी आँखों की ठंडक अपने बंदों की खुशी में रख।

  156. 156

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों में अपनी कुर्बत का इत्मिनान डाल दे।

  157. 157

    ऐ अल्लाह! हमारे हर काम को अपनी रज़ा का ज़रिया बना दे।

  158. 158

    ऐ अल्लाह! हमारी सेहत में बरकत और हमारे दिलों में शुक्र डाल दे।

  159. 159

    ऐ अल्लाह! हमारे वक्त को अच्छे कामों से भर दे और गाफ़िल न रख।

  160. 160

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को सुकून और हमारे चेहरों को रोशनी अता फ़रमा।

  161. 161

    ऐ अल्लाह! हमारे घर में कुरान की रोशनी और दुआ की खुशबू कायम रख।

  162. 162

    ऐ अल्लाह! हमारे दिल में अपनी याद का नूर भर दे और गफ़लत से बचा।

  163. 163

    ऐ अल्लाह! हमारे घर को फ़ितनों से बचा और अमन का गहवारा बना दे।

  164. 164

    ऐ अल्लाह! हमारे बच्चों को दीन पर कायम रख और उनकी फ़िक्र आसान कर।

  165. 165

    ऐ अल्लाह! जो मुसाफ़िर हैं उन्हें सलामती दे और घर लौटाएँ।

  166. 166

    ऐ अल्लाह! हमारे इलाके में अमन और खुशहाली अता फ़रमा।

  167. 167

    ऐ अल्लाह! हमारे दिल की तंगी दूर कर और हमें सुकून दे।

  168. 168

    ऐ अल्लाह! हमारी आँखों और ज़बान को सच्चाई पर कायम रख।

  169. 169

    ऐ अल्लाह! हमारे दस्तरख्वान पर बरकत और दिलों में शुक्र रख।

  170. 170

    ऐ अल्लाह! हमारी मेहनत को कबूल फ़रमा और हमारे रिज़्क में इज़ाफ़ा कर।

  171. 171

    ऐ अल्लाह! हमारे बुज़ुर्गों को सेहत और इज़्ज़त वाली ज़िंदगी दे।

  172. 172

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों से नफ़रत और झगड़े को दूर करके मोहब्बत दे।

  173. 173

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को अपनी रहमत की रोशनी से भर दे।

  174. 174

    ऐ अल्लाह! हमें दूसरों के दुख पर आँसू बहाने वाला दिल दे।

  175. 175

    ऐ अल्लाह! हमारी औलाद को अपनी राह पर चला।

  176. 176

    ऐ अल्लाह! हमारी बीमारियों को दूर कर और हमारी सेहत में बरकत दे।

  177. 177

    ऐ अल्लाह! हमारे लिए आसानी के दरवाज़े खोल दे।

  178. 178

    ऐ अल्लाह! हमारी उम्र को नेक अमल में बरकत वाली बना।

  179. 179

    ऐ अल्लाह! हमें अपने दुश्मनों से बचा और हमारे दिलों को साफ़ रख।

  180. 180

    ऐ अल्लाह! हमारे गुनाहों का बोझ हल्का कर और हमें माफ़ कर।

  181. 181

    ऐ अल्लाह! हमें अपनी जन्नत की खुशबू से नवाज़।

  182. 182

    ऐ अल्लाह! हमारे घरों में हर वक्त तेरी रहमत बरसती रहे।

  183. 183

    ऐ अल्लाह! हमें इल्म की दौलत अता फ़रमा जो नफ़ा दे।

  184. 184

    ऐ अल्लाह! हमें ऐसी दुआ दे जो तेरे दरबार में मकबूल हो।

  185. 185

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को अपनी मोहब्बत से सरशार कर दे।

  186. 186

    ऐ अल्लाह! हमारे लिए जो बेहतर है वह आसान कर और जो बुरा है उससे बचा।

  187. 187

    ऐ अल्लाह! हमारी आखिरत को दुनिया से बेहतर बना।

  188. 188

    ऐ अल्लाह! हमारे कामों में कामयाबी और दिलों में इत्मिनान दे।

  189. 189

    ऐ अल्लाह! हमें बुरे लोगों की संगत से बचा।

  190. 190

    ऐ अल्लाह! हमारे रिश्तों को मज़बूत और दिलों को नरम कर दे।

  191. 191

    ऐ अल्लाह! हमें हर आज़माइश में तेरा शुक्र करने वाला बना।

  192. 192

    ऐ अल्लाह! हमारी ज़िंदगी को तेरी रज़ा के मुताबिक गुज़ार।

  193. 193

    ऐ अल्लाह! हमें पाक दामन, सच्ची ज़बान और साफ़ दिल दे।

  194. 194

    ऐ अल्लाह! हमारे घर वालों को तेरी हिफ़ाज़त में रख।

  195. 195

    ऐ अल्लाह! हमारी दुआओं को हमारे लिए बरकत और हिदायत बना।

  196. 196

    ऐ अल्लाह! हमें हर नेकी की तौफ़ीक दे और हर बुराई से बचा।

  197. 197

    ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को अपनी तरफ़ मोड़ और हमें अपनी पनाह दे।

  198. 198

    ऐ अल्लाह! हमें दीन पर सच्चाई से चलने वाला बना।

  199. 199

    ऐ अल्लाह! हमारी मुश्किलों में आसानी और हमारे दिलों में सुकून दे।

  200. 200

    ऐ अल्लाह! हमारे सब अपनों को सलामत और खुश रख।

व्यावहारिक

Make your dua land

Dua is a conversation — presence matters more than length.

  • 01

    Make wudu and face the Qiblah

  • 02

    Begin with praise and Salawat

  • 03

    Ask with certainty, not doubt

  • 04

    Use the Arabic, then your own words

  • 05

    Include family and community

  • 06

    Persist through the whole day

उपयोगी जवाब

आम सवाल

Are the Quran and Hadith references verified?+

Quranic supplications show their Surah and Ayah, and reported duas show their collection. Where a report is graded differently by scholars, the reference is shown rather than treated as absolute.

Can I make dua in my own language?+

Yes. The Arabic supplications are the reported wording, but you may ask Allah in your own language with full presence of heart.

When is the best time to make these duas on Friday?+

There is a reported hour on Friday when supplications are answered, commonly understood as the later part of the day. Making dua across the whole day is safest.

Keep the list short and sincere

Write down the two or three things you most need, then ask for them across the whole of Friday rather than in one rushed minute.