हिंदी उद्धरण

जुमा मुबारक उद्धरण

Original Friday reflections to read, copy and share — kept clearly separate from sourced religious text.

शुक्रवार के लिए छोटे और सुंदर विचार। ये मूल पंक्तियाँ हैं, कुरान या हदीस नहीं।

200 संदेशReflections to copy or shareमूल सामग्रीहिन्दी
01

Original reflections

Friday words to carry with you

Read one slowly, then share the line that fits the person you have in mind.

  1. 01
    मूल विचार

    शुक्रवार समय का एक उपहार है, जो आत्मा के लिए है।

  2. 02
    मूल विचार

    अपनी जुमे की आदत में शुक्र को शामिल करें।

  3. 03
    मूल विचार

    शांत मन की शुरुआत नमाज़ से होती है।

  4. 04
    मूल विचार

    सबसे अच्छा जुमा वह है जो नरम दिल और सच्ची नीयत से बीते।

  5. 05
    मूल विचार

    हर जुमा एक नई शुरुआत का चुपचाप निमंत्रण देता है।

  6. 06
    मूल विचार

    रुकिए, नमाज़ पढ़िए, और दिन को याद दिलाने दीजिए कि क्या ज़रूरी है।

  7. 07
    मूल विचार

    जुमे पर किसी के साथ भलाई करना कभी व्यर्थ नहीं जाता।

  8. 08
    मूल विचार

    अपने जुमे में चुप्पी और दुआ के लिए जगह रखें।

  9. 09
    मूल विचार

    आपका आज का दिन आपकी चिंताओं से हल्का हो।

  10. 10
    मूल विचार

    जुमे की बरकत तब बढ़ती है जब उसे बाँटा जाए।

  11. 11
    मूल विचार

    जुमे पर की गई एक छोटी सी नेकी दूर तक पहुँचती है।

  12. 12
    मूल विचार

    अपनी नीयत फिर से ताज़ा करें, फिर दिन को उसका साथ दें।

  13. 13
    मूल विचार

    जुमा आपका ध्यान माँगता है, परिपूर्णता नहीं।

  14. 14
    मूल विचार

    इकट्ठा हों, याद करें और शुक्र अदा करें।

  15. 15
    मूल विचार

    सब्र से बड़ी कोई ताकत नहीं, खासकर जुमे के दिन।

  16. 16
    मूल विचार

    दिल का सुकून इबादत से मिलता है।

  17. 17
    मूल विचार

    आज किसी की भलाई के लिए दुआ करें।

  18. 18
    मूल विचार

    हर नेमत का शुक्र आपको और नेमतों तक ले जाता है।

  19. 19
    मूल विचार

    जुमे की खामोशी भी ज़िक्र बन सकती है।

  20. 20
    मूल विचार

    अपना काम ईमानदारी से करें, बरकत खुद आएगी।

  21. 21
    मूल विचार

    उम्मीद वह दुआ है जो पूरे हफ़्ते साथ चलती है।

  22. 22
    मूल विचार

    मुस्कुराहट भी एक सदका है जो किसी से कुछ नहीं लेता।

  23. 23
    मूल विचार

    जुमे का दिन घर में मोहब्बत का दिन बनाएँ।

  24. 24
    मूल विचार

    अपने रिश्तों को समय दें, यही असली बरकत है।

  25. 25
    मूल विचार

    नरमी से की गई बात दिलों का रास्ता खोल देती है।

  26. 26
    मूल विचार

    तौबा दिल को नया कर देती है।

  27. 27
    मूल विचार

    अपने दिल को अल्लाह की याद से भरें, बाकी सब आसान होगा।

  28. 28
    मूल विचार

    जुमे पर अपने दुख अल्लाह के सामने रखें।

  29. 29
    मूल विचार

    दूसरों की गलती को माफ़ करना बड़े दिल की निशानी है।

  30. 30
    मूल विचार

    सच बोलने से दिल हल्का होता है और ज़िंदगी आसान।

  31. 31
    मूल विचार

    हर सुबह एक नया मौका है, उसे बर्बाद न करें।

  32. 32
    मूल विचार

    दूसरों के लिए आसानी बनाना सदका-ए-जारिया है।

  33. 33
    मूल विचार

    जुमे को दिल को शुक्र और सब्र से आबाद रखें।

  34. 34
    मूल विचार

    अल्लाह की याद में दिल को सुकून मिलता है, यह सच है।

  35. 35
    मूल विचार

    परिवार की कद्र करें, यही रहमत का ज़रिया है।

  36. 36
    मूल विचार

    ज़िंदगी का हर पल अमानत है, उसे भलाई में लगाएँ।

  37. 37
    मूल विचार

    सफलता वह है जो अल्लाह की रज़ा के साथ मिले।

  38. 38
    मूल विचार

    जुमे की रोशनी को अपने दिल में उतारें।

  39. 39
    मूल विचार

    सच बोलना दिल को हल्का और ज़िंदगी को आसान बनाता है।

  40. 40
    मूल विचार

    अपने हाथ से किसी का भला करें, दिल संतुष्ट होगा।

  41. 41
    मूल विचार

    हर दिन को अल्लाह के शुक्र से शुरू और खत्म करें।

  42. 42
    मूल विचार

    दिल को सब्र की आदत डालें, सुकून खुद आएगा।

  43. 43
    मूल विचार

    जुमा हमें यह भी सिखाता है कि दिल में नेक इरादे रखें।

  44. 44
    मूल विचार

    दुआ में अपने सभी प्रियजनों को शामिल करें।

  45. 45
    मूल विचार

    जो दूसरों को सुकून दे, वह खुद भी सुकून पाता है।

  46. 46
    मूल विचार

    अच्छे किरदार से बड़ा कोई पैगाम नहीं।

  47. 47
    मूल विचार

    जुमे पर खुद से वादा करें कि आज बेहतर बनेंगे।

  48. 48
    मूल विचार

    हर हाल में अल्लाह का शुक्र, यही मोमिन की शान है।

  49. 49
    मूल विचार

    खामोशी से दी गई मदद सबसे पवित्र होती है।

  50. 50
    मूल विचार

    दिल की सफ़ाई ही असली वज़ू है।

  51. 51
    मूल विचार

    अपनी दुआओं में अपने समाज को भी याद रखें।

  52. 52
    मूल विचार

    जुमे का संदेश है कि रहमत हर दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।

  53. 53
    मूल विचार

    अपने परिवार के साथ बैठकर दुआ करना सुकून है।

  54. 54
    मूल विचार

    हर काम में इख्लास हो तो वह इबादत बन जाता है।

  55. 55
    मूल विचार

    दिल की सख्ती को नरमी से बदलें, ज़िंदगी आसान होगी।

  56. 56
    मूल विचार

    अल्लाह का ज़िक्र करने वाले दिल कभी नहीं थकते।

  57. 57
    मूल विचार

    जुमे के दिन अपनी गलतियों को याद करके माफ़ी माँगें।

  58. 58
    मूल विचार

    अच्छी बात सुनकर दिल को खुला रखें।

  59. 59
    मूल विचार

    हिम्मत और हौसला दुआ से आता है।

  60. 60
    मूल विचार

    हर मुस्कान में दुआ की रोशनी हो सकती है।

  61. 61
    मूल विचार

    दूसरों का सम्मान करें, यही सबसे बड़ी तरबियत है।

  62. 62
    मूल विचार

    जुमे को अपने दिल की बात अल्लाह से करें।

  63. 63
    मूल विचार

    कुर्बानी और त्याग जुमे की रूह है।

  64. 64
    मूल विचार

    सोते और जागते हर वक्त अल्लाह को याद रखें।

  65. 65
    मूल विचार

    हर सच्ची दुआ में एक उम्मीद छिपी है।

  66. 66
    मूल विचार

    जुमे का दिन सुकून, शुक्र और मोहब्बत का दिन है।

  67. 67
    मूल विचार

    अपने दिल के दरवाज़े सबके लिए खुले रखें।

  68. 68
    मूल विचार

    इबादत दिल की ज़िंदगी है, उसे न छोड़ें।

  69. 69
    मूल विचार

    जुमे पर एक नया अहद करें: नेकी, सब्र और शुक्र।

  70. 70
    मूल विचार

    दुआ वह अमानत है जो दिल से दिल तक पहुँचती है।

  71. 71
    मूल विचार

    शाम की दुआ पूरे दिन की दिशा तय करती है।

  72. 72
    मूल विचार

    नरम शब्द बोलना दिलों के दरवाज़े खोल देता है।

  73. 73
    मूल विचार

    जुमे पर अपने गुनाहों को याद करके तौबा करें।

  74. 74
    मूल विचार

    हर नमाज़ एक मुलाकात है, उसे संजीदगी से निभाएँ।

  75. 75
    मूल विचार

    दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूँढना सच्ची मोहब्बत है।

  76. 76
    मूल विचार

    वक्त एक अमानत है, उसे आखिरत के लिए खर्च करें।

  77. 77
    मूल विचार

    हर रात एक सबक लेकर आती है: शुक्र और माफ़ी।

  78. 78
    मूल विचार

    जो अल्लाह पर भरोसा करता है, उसे कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता।

  79. 79
    मूल विचार

    दिल की सफ़ाई से नज़र में रोशनी आती है।

  80. 80
    मूल विचार

    एक मुस्कुराहट किसी का दिन बदल सकती है।

  81. 81
    मूल विचार

    बड़ों की इज़्ज़त और छोटों पर शफ़क़त करें।

  82. 82
    मूल विचार

    जुमे का पैगाम है कि दिल का दरवाज़ा अल्लाह के लिए खुला रखें।

  83. 83
    मूल विचार

    जो वक्त अल्लाह की याद में गुज़रे, वह कभी बेकार नहीं जाता।

  84. 84
    मूल विचार

    सब्र एक रोशनी है जो अँधेरे रास्तों में साथ देती है।

  85. 85
    मूल विचार

    हर नई सुबह अल्लाह की तरफ़ से एक तोहफ़ा है।

  86. 86
    मूल विचार

    दूसरों की गलती पर पहले अपनी गलती देखें।

  87. 87
    मूल विचार

    किसी भलाई को छोटा न समझें, अल्लाह के यहाँ वह बड़ी है।

  88. 88
    मूल विचार

    जुमे पर अपने दिल का बोझ अल्लाह के हवाले करें।

  89. 89
    मूल विचार

    शुक्र अदा करने से दिल को सुकून और ज़िंदगी में बरकत मिलती है।

  90. 90
    मूल विचार

    नमाज़ वह रोशनी है जो पूरे दिन को महफ़ूज़ रखती है।

  91. 91
    मूल विचार

    जो दूसरों को माफ़ करता है, अल्लाह उसके गुनाह माफ़ करता है।

  92. 92
    मूल विचार

    मुश्किल वक्त में सब्र करना सबसे बड़ी इबादत है।

  93. 93
    मूल विचार

    अपनी ज़बान से किसी का दिल न दुखाएँ, यह भी सदका है।

  94. 94
    मूल विचार

    हर दुआ में अल्लाह की हिकमत है, कभी जल्दी और कभी बेहतर वक्त पर।

  95. 95
    मूल विचार

    जुमे को अपने देश, परिवार और दोस्तों के लिए भी दुआ करें।

  96. 96
    मूल विचार

    अच्छे अमल का असर दिल पर और घर पर साफ़ दिखता है।

  97. 97
    मूल विचार

    दिल की तंगी दूर करने का रास्ता अल्लाह के ज़िक्र में है।

  98. 98
    मूल विचार

    हर घड़ी अल्लाह को याद रखना सुकून का सबसे आसान रास्ता है।

  99. 99
    मूल विचार

    जो सच को अपनाता है, उसका रास्ता खुद रोशन होता है।

  100. 100
    मूल विचार

    अपनी नीयत को सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए साफ़ करें।

  101. 101
    मूल विचार

    हर मुश्किल के बाद आसानी है, यह कुरान का वादा है।

  102. 102
    मूल विचार

    जुमे पर घर में मिलकर दुआ करना बरकत का ज़रिया है।

  103. 103
    मूल विचार

    सखावत दिल को बड़ा करती है और शुक्र उसे और रोशन करता है।

  104. 104
    मूल विचार

    जो लोगों के लिए आसानी पैदा करता है, अल्लाह उसके लिए आसानी पैदा करता है।

  105. 105
    मूल विचार

    याद-ए-इलाही से भरी ज़िंदगी में सुकून और इल्म दोनों आते हैं।

  106. 106
    मूल विचार

    आज की खामोशी में अल्लाह की आवाज़ सुनने की कोशिश करें।

  107. 107
    मूल विचार

    घर का सुकून अल्लाह की देन है, उसे शुक्र और मोहब्बत से बाँटें।

  108. 108
    मूल विचार

    जुमे का सबक है कि अल्लाह सब देख रहा है और सब सुन रहा है।

  109. 109
    मूल विचार

    याद रखें, सच्ची तौबा गुनाह को भी नेकी में बदल सकती है।

  110. 110
    मूल विचार

    दूसरों के दुख में शरीक होना दिल को बड़ा बनाता है।

  111. 111
    मूल विचार

    सब्र और शुक्र दोनों साथ चलें तो ज़िंदगी आसान होती है।

  112. 112
    मूल विचार

    हर अच्छा काम अल्लाह के नाम से शुरू करें।

  113. 113
    मूल विचार

    अपने बच्चों को नेकी और सच्चाई का सबक दें।

  114. 114
    मूल विचार

    दिल को अच्छे खयालों से भरें, ज़बान खुद मीठी हो जाएगी।

  115. 115
    मूल विचार

    जुमे का पैगाम है: रहमत को अपनाएँ और सख्ती छोड़ें।

  116. 116
    मूल विचार

    आज एक घर में खुशी लाने की कोशिश करें।

  117. 117
    मूल विचार

    ज़िंदगी की हर छोटी खुशी अल्लाह की एक नेमत है।

  118. 118
    मूल विचार

    जो दिल अल्लाह की तरफ़ झुकता है, वह दुनिया की आँधी से नहीं टूटता।

  119. 119
    मूल विचार

    सच के रास्ते में थोड़ी तकलीफ है, मगर अंजाम रोशन है।

  120. 120
    मूल विचार

    हर उम्मीद का रिश्ता अल्लाह की रहमत से जुड़ता है।

  121. 121
    मूल विचार

    खुद को सुधारने की कोशिश ही असली जुमे की आदत है।

  122. 122
    मूल विचार

    अपने दिल को हर रोज़ एक नए इरादे से भरें।

  123. 123
    मूल विचार

    जुमे और हर दिन अल्लाह का शुक्र अदा करें।

  124. 124
    मूल विचार

    दूसरों के लिए आँखों में नरमी रखें, दिल खुद हल्का होगा।

  125. 125
    मूल विचार

    इबादत का लुत्फ़ दिल की हाज़िरी में है।

  126. 126
    मूल विचार

    आज की एक खालिस नेकी कल की बड़ी खुशी बन सकती है।

  127. 127
    मूल विचार

    जुमे को दिल को कुरान की तिलावत से ताज़ा करें।

  128. 128
    मूल विचार

    हर हाल में अल्लाह के फ़ैसलों पर राज़ी रहना सुकून है।

  129. 129
    मूल विचार

    सब्र और शुक्र के साथ जीने वाला कभी टूटता नहीं।

  130. 130
    मूल विचार

    अपने घर में अल्लाह का ज़िक्र और मेहमान की इज़्ज़त रखें।

  131. 131
    मूल विचार

    हर जुमा अल्लाह की तरफ़ एक नया कदम है।

  132. 132
    मूल विचार

    कामयाबी का राज़ सब्र, शुक्र और दुआ में छिपा है।

  133. 133
    मूल विचार

    जो लोगों की भलाई सोचता है, उसका दिल कभी खाली नहीं होता।

  134. 134
    मूल विचार

    हर दुख की दवा अल्लाह की याद और सब्र में है।

  135. 135
    मूल विचार

    अपने वक्त को नेकी और इल्म में लगाएँ।

  136. 136
    मूल विचार

    जुमे को किसी के लिए छोटी सी दुआ भी बड़ी खुशी बन सकती है।

  137. 137
    मूल विचार

    दुनिया की भागदौड़ से कुछ देर दिल को आराम दें, अल्लाह के साथ बैठें।

  138. 138
    मूल विचार

    हर सही फ़ैसला अल्लाह के साथ शुरू होता है।

  139. 139
    मूल विचार

    दिल का सुकून और घर का अमन सबसे बड़ी नेमत है।

  140. 140
    मूल विचार

    सुबह की दुआ पूरे दिन की रहनुमाई करती है।

  141. 141
    मूल विचार

    नरमी से कही गई बात दिलों का रास्ता खोल देती है।

  142. 142
    मूल विचार

    जुमे पर अपने रिश्तों को वक्त दें, यही असली बरकत है।

  143. 143
    मूल विचार

    हर किसी के साथ नर्मी से पेश आएँ, वह आपके लिए दुआ करेगा।

  144. 144
    मूल विचार

    आप जिस तरह दूसरों से पेश आते हैं, उसी से आपकी पहचान बनती है।

  145. 145
    मूल विचार

    सब्र का फल मीठा होता है, बस इंतज़ार करना सीखें।

  146. 146
    मूल विचार

    अपने घर को मोहब्बत और दुआ की जगह बनाएँ।

  147. 147
    मूल विचार

    किसी का दुख बाँटना भी एक इबादत है।

  148. 148
    मूल विचार

    जुमे की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती है।

  149. 149
    मूल विचार

    शुक्र अदा करने वाला दिल हमेशा नई नेमत पाता है।

  150. 150
    मूल विचार

    सच्चा इंसान वह है जिससे दूसरों को सुकून मिले।

  151. 151
    मूल विचार

    अपने कामों में ईमानदारी ही असली बरकत है।

  152. 152
    मूल विचार

    दिल की गहराई से की गई दुआ ज़रूर असर दिखाती है।

  153. 153
    मूल विचार

    नेक इरादा हो तो छोटा कदम भी मंज़िल तक ले जाता है।

  154. 154
    मूल विचार

    जुमा हमें याद दिलाता है कि अल्लाह हमेशा करीब है।

  155. 155
    मूल विचार

    हर दिन को अल्लाह की नेमतों की गिनती से शुरू करें।

  156. 156
    मूल विचार

    माफ़ करना वह ताकत है जो दिल को बोझ से आज़ाद करती है।

  157. 157
    मूल विचार

    सादगी में भी सुकून और बरकत हो सकती है।

  158. 158
    मूल विचार

    मेहनत को इबादत समझें, तो काम भी इबादत बन जाता है।

  159. 159
    मूल विचार

    अच्छे अल्फ़ाज़ एक छोटा सा सदका हैं।

  160. 160
    मूल विचार

    ग़ुस्से को टालना भी एक बड़ी नेकी है।

  161. 161
    मूल विचार

    ख़ामोशी में भी ज़िक्र हो सकता है, जुमे को यह याद रखें।

  162. 162
    मूल विचार

    दिल को दुनिया के शोर से दूर रखें तो अल्लाह की आवाज़ सुनाई देती है।

  163. 163
    मूल विचार

    जो दूसरों के लिए आसानी बनाता है, अल्लाह उसके लिए आसानी बनाता है।

  164. 164
    मूल विचार

    मुश्किल वक्त में सब्र करने वाले का अज्र बहुत बड़ा है।

  165. 165
    मूल विचार

    दूसरों की कामयाबी पर खुश होना भी शुक्र की एक सूरत है।

  166. 166
    मूल विचार

    जुमे की रोशनी को अपने कामों में उतारें।

  167. 167
    मूल विचार

    माँ-बाप की खिदमत जन्नत का रास्ता है।

  168. 168
    मूल विचार

    दिल की सफ़ाई से बड़ा कोई श्रृंगार नहीं।

  169. 169
    मूल विचार

    अच्छा इंसान वह है जिसके पास लोग सुकून महसूस करें।

  170. 170
    मूल विचार

    सच्चा दोस्त वह है जो दुआ में याद रखे।

  171. 171
    मूल विचार

    अपने गुनाहों पर शर्मिंदगी ही तौबा का पहला कदम है।

  172. 172
    मूल विचार

    जुमे के दिन बेमकसद बातों से बचें।

  173. 173
    मूल विचार

    हर दुआ कबूल होती है, कभी फ़ौरन और कभी बेहतर वक्त पर।

  174. 174
    मूल विचार

    अल्लाह के लिए की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

  175. 175
    मूल विचार

    घर का दरवाज़ा मेहमान के लिए खुला रखें, बरकत आएगी।

  176. 176
    मूल विचार

    हर दिन की शुरुआत बिस्मिल्लाह से करें।

  177. 177
    मूल विचार

    दिल को अल्लाह के ज़िक्र से भर दें, बाकी सब आसान हो जाएगा।

  178. 178
    मूल विचार

    रिज़्क में बरकत ईमानदारी और शुक्र से आती है।

  179. 179
    मूल विचार

    जुमे का दिन दुआ की कबूलियत की उम्मीद का दिन है।

  180. 180
    मूल विचार

    अपनी ज़बान को ज़िक्र से तर रखें।

  181. 181
    मूल विचार

    गरीब की मदद करना दिल को बड़ा बनाता है।

  182. 182
    मूल विचार

    खुशी और ग़म दोनों में अल्लाह का शुक्र अदा करें।

  183. 183
    मूल विचार

    जुमा हमें सिखाता है कि असली सहारा अल्लाह है।

  184. 184
    मूल विचार

    सच्ची खुशी दूसरों की खुशी में छिपी है।

  185. 185
    मूल विचार

    हर दिन को नई नीयत से शुरू करें।

  186. 186
    मूल विचार

    अपने दिल को हमेशा अल्लाह की तरफ़ झुकाए रखें।

  187. 187
    मूल विचार

    घर में मोहब्बत का माहौल सबसे बड़ी नेमत है।

  188. 188
    मूल विचार

    दूसरों की गलती को नज़रअंदाज़ करना बड़ा हौसला है।

  189. 189
    मूल विचार

    दुआ में यकीन हो तो रास्ते खुद खुलने लगते हैं।

  190. 190
    मूल विचार

    जुमे की नमाज़ के बाद दिल को शुक्र से भर लें।

  191. 191
    मूल विचार

    अपनी कोशिशों पर नहीं, अल्लाह की मदद पर भरोसा रखें।

  192. 192
    मूल विचार

    एक नेक अमल भी दिल की रोशनी बढ़ाता है।

  193. 193
    मूल विचार

    ख़ामोश दुआ भी दिल को सुकून देती है।

  194. 194
    मूल विचार

    अपने दिन में थोड़ा वक्त अल्लाह के लिए निकालें।

  195. 195
    मूल विचार

    दिल की नर्मी ही असली ताकत है।

  196. 196
    मूल विचार

    जुमे को सलाम को आम करें, मोहब्बत बढ़ेगी।

  197. 197
    मूल विचार

    शुक्र वह इबादत है जो नेमत को बढ़ाती है।

  198. 198
    मूल विचार

    जो थके हुए दिल को सहारा दे, वह सबसे अच्छा है।

  199. 199
    मूल विचार

    अल्लाह की रहमत से कभी नाउम्मीद न हों।

  200. 200
    मूल विचार

    आज की एक छोटी नेकी कल की बड़ी राहत बन सकती है।

व्यावहारिक

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आम सवाल

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